Saturday, July 30, 2011

हे अतिथि (कसाब) तुम कब जाओगे ?"

कल शाम से ही स्वर्ग और नरक या कहे तो जन्नत और जहन्नुम  दोनों में हडकंप मचा हुआ है कारण आप सब जानते है. वो एसा कारण तो है ही जिसके कारण हडकंप मच सके आखिर उसने २६ नवम्बर २००८ को पूरे मुंबई में हडकंप मचा दिया था. हाँ में उसी महान (अन्यथा ना ले पर पिछले दो साल से जिस तरह से उसे सर आँखों पर बिठाकर उसकी मेहमाननवाजी कर  रहे  हैं उसे देखकर अब यही लगता है) आतंकवादी ,हत्यारे कसाब की बात कर रही हू .हमारे देश में जब जमाई (बेटी का पति) घर आता है तो उसकी खूब खातिरदारी की जाती है उसे किसी तरह की कोई तकलीफ ना हो ये ध्यान रखा जाता है.कसाब को  जेल में जो सुविधाएं प्रदान की गई उन्हें देखकर लगता है वो जमाई जेसे मजे लूट रहा है .


 हम स्वर्ग- नरक पर थे वहा हडकंप मचा हुआ है क्यूंकि कसाब ने अपनी फासी की सजा के खिलाफ उच्चतम नयायालय जाने का फैसला लिया है अब साल भर वो वहा निकाल लेगा और फिर भी संतुष्टि ना मिली तो राष्ट्रपति  के पास अर्जी दे देगा....हाँ तो स्वर्ग में हडकंप इसलिए है क्यूंकि २६/११ के हमले में जो बेकुसूर मारे गए उनकी आत्माएं कराह रही है बार बार कह रही है "हमें किसी ने मौका क्यों नहीं दिया काश हमें भी मौका मिला होता कुछ पल और जीने का" .इन आत्माओं के साथ वो आत्माएं भी दुखी है जो हाल ही में हुए मुंबई हमले के कारण वहा पहुंची है.आखिर सबका एक ही दुःख है हम उस हत्यारे को सजा तक नहीं दे पा रहे जिसने इतने मासूम लोगो को अधूरी जिंदगी और अकाल मृत्यु की सौगात दी.
            
इधर नरक में हडकंप इसलिए है क्यूंकि यमराज उसका कई दिनों से इन्तेजार कर रहे है वो आएगा तो क्या गत बनाई जाए .वेसे सूत्रों से पता चला है की वो भ्रम में थे की  कसाब को वेसी ही सुविधाएं देनी है जेसी भारत में उसे दी जा रही है या उसे उसके कर्मों की सजा दी जाए.उनका ये भ्रम चिर्तागुप्त ने दूर कर दिया है ये कहकर यहाँ कर्मों के हिसाब से दंड दिया जाएगा हम भारत  की तरह व्यवहार नहीं कर सकते. हमने इन्हें अतिथि देवो भव: की सीख क्या दी ये तो सबकी मेहमान नवाजी करने लगे है....पर हम भी एसा ही करेंगे तो लोगो का हम पर से भी(से भी इसलिए क्यूंकि सर्कार से लगभग उठने लगा है) विश्वास उठने लगेगा.हमने इन्हें उपकार की भावना सिखाई,ये सिखाया की मानव मात्र की सेवा करो अब ये इतने उपकारी बन गए है की इन्हें बस एक ही मानव दिख रहा है पूरे देश में और ये बस उसी पर उपकार किए जा रहे है .पर जब वो यहाँ आएगा तो हम उससे इन रोती बिलखती आत्माओं के हर दर्द का हिसाब लेंगे.

पिछले दो साल से वो कभी कहता है  मैंने जुर्म किया, कभी कहता है नहीं किया,कभी कहता है में दोषी हू पर ,मृत्युदंड  मत दो.हर बार वो हमारे न्यायालय को बरगला रहा है और हम उसे झेल रहे है .हमारी न्याय व्यवस्था कहती है निर्दोष को दंड नहीं मिलना चाहिए पर सब जानते है वो दोषी है एसा दोषी जिसका दोष अगर क्षमा किया गया तो जाने कितने कसाब और आएँगे  और सीना ठोककर २६ नवम्बर और १३ जुलाई जेसी घटनाओं को अंजाम देंगे.पर हम चुप है जेसे काठ मार गया हो सबको.....बोलेंगे भी क्यों?हमें आदत पड़ गई है चुप रहने की.


भारत सरकार ने करोडो रूपए उसके ऊपर खर्च कर दिए कभी सुरक्षा ,कभी मानवाधिकार ,कभी मानवीयता के नाम पर . और विश्वास करिए ये पैसा नेताओं का नहीं है, ये वो पैसा है जो हम लोगो ने सरकार को टैक्स के रूप में दिया है .इसमें से कुछ पैसा वो भी होगा जो उन लोगो ने या उनके परिवार वालों ने टैक्स में दिया होगा जिनकी जाने इन आतंकी हमलों में चली गई.दिल रो उठता है ये सोचकर हमारी रुपया रुपया बचाकर देश सेवा के लिए टैक्स के रूप में दी गई राशि जान लेने वालों पर लुटाई जा रही है...

  हाँ तो नरक स्वर्ग में क्या हुआ आगे देखते है कल की घटना के बाद वहा हडकंप है क्यूंकि, यमराज पिछले  २ साल से उसके लिए इतर से भरी कढाई को आग पर रखकर बेठे है ताकि उसे उसमे डाला जा सके (आखिर वो इतर के बिना नहीं रह सकता ना) उसके लिए स्पेशल उर्दू  अखबार  का छापाखाना खुलवाया गया है ताकि उसे दोजख की आग झेलते समय आराम से पेपर पढने मिल सके. उसके घूमने के लिए विशेष रोड बनाया गया है ताकि वहा उसे उसे सख्त से सख्त सजा दी जा सके (आखिर अन्दर कमरों में रहकर बेतना उसे पागल बना सकता है)..सबको उसका बेसब्री से इन्तेजार है वहां.बस दिन रात एक ही बात है "हे कसाब तुम कब आओगे? "और मुझे तो अभी बस वो फिल्म याद आ रही है जिसमे घर के लोग अतिथि से परेशान हो जाते है. वही हाल आम भारतीय का है सबके मन में बस एक बात है " हे अतिथि (कसाब) तुम कब जाओगे ?"

कनुप्रिया गुप्ता 
सभी चित्र गूगल देवता से साभार.जिन भी लोगो ने ये कार्टून बनाये   है उनका धन्यवाद

13 comments:

Mohinee said...

सही है कनुजी! क्या बोलें, जी तो करता है इधर ही इनको नरक दिखला दे|

बहुत सही प्रस्तुति, आपके लेखन में बहुत शक्ति है|

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh said...

आपका यह लेख अच्छा लगा मैंने भी ''अजमल कसाब का जिहादियों के नाम एक पत्र'' अभी हाल ही में लिखा था. मौका मिले तो पढियेगा... http://sumitketadke.blogspot.com/2011/07/blog-post_20.html पर...

प्रवीण पाण्डेय said...

महाअतिथि बना कर रखा है।

Saru Singhal said...

It shows how weak our judiciary and political system is...Nice writeup.

Bhushan said...

सरू सिंघल से सहमत होते हुए इतना कहना है कि - Kasab is well fed and others are fed up :))

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 01-08-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर सोमवासरीय चर्चा में भी होगी। सूचनार्थ

S.N SHUKLA said...

व्यंग्य भी, कटाक्ष भी , संदेशात्मक पोस्ट , आभार

S.M.HABIB said...

वो शाही मेहमान हैं...
सरकार मेहरबान है...

kanu..... said...

shukla ji,saru, praveen ji,minakshi ji,bhushan ji ,chandra bhushan ji, aur sumit ji.bahut bahut dhanyawad aap sabhi ka

vidhya said...

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

रेखा said...

एकदम सही बात उठाई है . देश का दुर्भाग्य ही है कि करोड़ों रुपये जरुरतमंदों पर खर्च होने के बजाय ऐसे -ऐसे अपराधियों पर लुटाए जा रहे हैं. कुछ अमेरिका से ही सीख लेती हमारी सरकार

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग said...

bahut hi achhi rachna jo hamari shasan ke dohre charitra ko chitrit karti hai.

Anonymous said...

It's obviously what I am looking for , very great information , cheer!