Friday, July 1, 2011

खूबसूरती आँखों में है तो खता भी खूबसूरत है


खूबसूरती  आँखों में है तो खता भी खूबसूरत है
अपनेपन से दी हुई दुआ भी खूबसूरत है
अपनी आँखों पर प्रेम का चश्मा चढ़ा के देख
खुदा की दी हुई हर वजह ही खूबसूरत  है

खूबसूरती हर शय में है बस देखने वाले की आँखों  में खूबसूरती का अहसास होना चाहिए ,मै जानती हू १०० में ९० प्रतिशत लोग चेहरे की सुन्दरता पर जाते है पर  नजर में ख़ूबसूरती की पहचान ही बचे हुए १० प्रतिशत लोगो को दूसरों से अलग करती है .हर इंसान के लिए खूबसूरती के अपने मायने अलग होते है इंसान का चेहरा उसका साथ एक समय के बाद छोड़  देता है  पर मन की खूबसूरती  हमेशा उसके साथ रहती है और उसके जाने के बाद वो लोगो के दिलों मे उसे एक अलग जगह देती है.
एक बार एक लड़की  से  किसी ने पूछा की उसे दुनिया मे सबसे खूबसूरत ३ चीजें क्या लगती है?उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया -मेरी बिल्ली,मेरी मेरी डॉल और मेरी दादी .पूछने वाले ने बड़े आश्चर्य से पुछा की डॉल पसंद है ये तो समझ मे आता है पर दादी और बिल्ली क्यों?उसने जवाब दिया :मेरी माँ बचपन मे ही मुझे छोड़कर चली गई थी तब से मेरी दादी ने ही मुझे प्यार किया ,वो मुझे हमेशा से मुझे अपने पास सुलाती थी,मुझे मनपसंद खाना बनाकर खिलाती थी , मुझे अच्छी अच्छी कहानियां सुनाती थी उनके झुर्री भरे चेहरे में ही मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत नजर आती थी.और बिल्ली मुझे इसलिए पसंद है की दादी के जाने के बाद ये मेरी साथी बन गई .और डॉल इसलिए की वो मेरी सबसे अच्छी सहेली थी वो नई गुडिया नहीं थी पुरानी सी गुडिया थी पर मुझे सबसे ज्यादा प्यारी थी में अपनी हर बात उससे करती थी.वो आज भी संभलकर रखी है मैंने मेरे लिए खूबसूरती इन्ही  सब मे है .लोगो को देखने मे शायद ये सब खूबसूरत ना लगे पर आप मेरी आँखों से देखेंगे तो यही खूबसूरत है.....
यही है खूबसूरती किसी परिभाषा से परे किसी अभिव्यंजना से हटकर,किसी तुलना से अलग दिल के कोने मे अपनी जगह बनाती है.जो लोग चेहरे,कपड़ो और रहन सहन मे सुन्दरता ढूंढते है वो कभी ना कभी ओंधे मुह गिरते है और तब उन्हें सहारा देने  कोई मन का सुन्दर इंसान ही आता है .चेहरे मोहरे  कपड़ों और भड़कीले साज श्रृंगार के आधार पर किसी की तुलना करना और किसी को कम आंककर उसे नीचा दिखने की कोशिश करना उसका दिल दुखाना उतना ही बड़ा पाप है जितना भगवन का अपमान करने पर लगता है.
बहुत सालों पहले आई एक हिंदी फिल्म थोडा सा रूमानी हो जाए याद आ रही है मुझे , सुन्दरता की अनोखी परिभाषा है उस फिल्म मे.किस तरह प्यार और मन की सुन्दरता शारीरिक सुन्दरता से कई बढ़कर है जब तक इस बात का अहसास नहीं तब तक सब बंजर है धरती भी मन भी. पर जेसे ही इस बात का अहसास होता है धरती भी हरी भरी हो जाती है और मन भी खिल उठता है.  आतंरिक सुन्दरता ही है जो इंसान के चेहरे पर तेज लाती है .
अगर आप भी सिर्फ चेहरे और दिखने वाली सुन्दरता के कायल  है तो संभल जाइये क्यूंकि नकली सुन्दरता से धोका खाकर कहीं आपको भी पछताना ना पड़े.......

4 comments:

loks said...

इस लेख को पढ़कर मुझे एक बहुत ही ख़ूबसूरत hollywood मूवी की याद आ रही है जिसका नाम है - SHALLOW HAL
इस सुब्जेक्ट के साथ इस मूवी ने पूरी तरह जस्टिस किया है!

http://en.wikipedia.org/wiki/Shallow_Hal

Bhargav said...

words are concept here... very truely said, read the eyes and not the physic...

संजय भास्कर said...

truly brilliant..
keep writing......all the best

kanu..... said...

sanjay ji aapke comments ke lie bahut bahut dhanyawad.
aapka blog dekha bahut accha likhte hai aap.