Wednesday, July 13, 2011

पापा तुम घर क्यों न लौटे?

मुंबई में धमाके ,कितनी ही जानें बस एसे चली गई जेसे हवा हो,किसी ने बेटा किसी ने पति किसी ने माँ,किसी ने पिता खो दिया . उनके दर्द को हम लोग शायद नहीं समझ सकते पर मैंने एक छोटी सी कोशिश की है समझने की ,कि जब सुबह घर से काम के लिए निकले किसी के पापा घर नहीं लौटते होंगे तो क्या भावनाएं हो सकती है....

पापा तुम घर क्यों न लौटे?
मैंने तो सोचा था आज जब आओगे तो मेरे लिए मीठी टॉफी लाओगे
ना लाओगे तो में जिद करके तुम्हारे ऊपर झूम जाऊंगी
पर में इन्तेजार ही करती रह गई तुम नहीं आए
अब कौन मुझे टॉफी  लाकर देगा?

देखो ना तुम्हारे जाने से मैं अकेली हो गई
बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

सब कहते है तुम चले गए
पर कहा चले गए  पापा तुम?
सुबह तो कहकर गए थे कि जल्दी आऊंगा
तुम्हे बाहर घुमाने ले जाऊंगा
पर अब तो इतनी देर हो गई कल से आज तक नहीं आए .
अब में किसके कंधे पर बैठकर बाहर जाउंगी?
जब आओगे तो खूब रूठकर बेठुंगी तुमसे

बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

माँ कल तक कितनी सुन्दर दिखती थी
लाल चूड़ियों ,हरी साडी ,और लाल बिंदी में
पर आज जाने क्यों सारे रंगों से अचानक दूर हो गई
पापा जब वापस आओगे तो माँ को कहना कि एसे रंगों से दूर ना रहे
उनपर रंग बड़े अच्छे लगते है

तुम्हारे ना आने से देखो माँ के सारे रंग चले गए
बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

कल शाम से ही दादी रो रही है
इतनी जोर से रोती है कि सारा मोहल्ला इकठ्ठा हो गया है
मै कब से चुप करने कि कोशिश कर रही हु पर वो चुप ही नहीं होती
पापा तुम ही कहते थे ना शोर मत करो पड़ोसियों को तकलीफ होती है
पर जाने क्यों आज दादी ये बात भूल गई है
पापा जब आओगे तब दादी को जरूर समझाना
वो रोती हुई अच्छी नहीं लगती मुझे

देखो ना तुम्हारे जाने से दादी कि आँखों में कितने आंसू है
बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

कल से दादा कितने बदहवास से है
जाने कहाँ कहाँ फ़ोन लगाते है
बार बार छाता उठाकर जाने कहा जाते है
देखो ना उन्हें तो पानी में जाना बिलकुल पसंद नहीं
आज उनने मम्मी से बरसात में कुछ गरमा  गरम बनाने के लिए भी नहीं कहा
कल से कुछ नहीं खाया उनने
उनकी तबियत बिगड़  जाएगी .....
जब आओगे तो उन्हें प्यार से खिलाना और मीठी सी  डांट भी लगाना

सुनो ना आपके जाने से देखो उनके मुह से निवाला नहीं उतरता
बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

देखो ना कल से सब बस न्यूज़ चैनल देख रहे है,कोई मुझे कार्टून नहीं देखने देता
हमारे प्यारे घर में भीड़ इकट्ठी हो गई है
सब रोते है ,कितने गंदे लगते है सब रोते हुए
मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा
सब क्यों बार बार मेरे सर पर हाथ फेर रहे है
जेसे में बिचारी हूँ
माँ को भी सब एसे ही देख रहे है

देखो ना आपके जाने से सबके चेहरे से मुस्कान चली गई
बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

जल्दी आ जाओ ना पापा
मैं आपको बिलकुल तंग नहीं करुँगी
गुडिया , टॉफी कुछ नहीं मांगूंगी
आपसे रिमोट भी नहीं लूंगी,आपके कंधे पर भी नहीं चढूँगी
आ जाओ ना पापा

देखो ना आपके जाने से कुछ भी अच्छा नहीं लगता
बताओ ना पापा तुम घर क्यों ना लौटे?

28 comments:

Mohinee said...

I am in tears..............crying.......!

kanu..... said...

same here mohini.jindagi kse achanak se mod le leti hai pata bhi nahi chalta.haste muskurate log achanak se ankhon se door ho jate hai....

महेश बारमाटे "माही" said...

जिसका कोई अपना रूठ जाता है,
वही अपना दर्द समझ सकता है...

आपकी कविता ने मुझे मेरे पापा की याद दिला दी...

बहुत सुन्दर कविता के लिए आभार...

आप भी पढ़ें -

लौट आओ पापा

kanu..... said...

सही कहा माही जिसके पैर ना फटे बिवाई वो क्या जाने पीर पराई.
ना जाने कितने घरों में दर्द का आलम होगा इस समय ...हम तो सोचकर ही दहल जाते है....

Bhargav said...

i could not read... you jz made me cry....

what the hell is going on in india... what the hell our politicians are doing...

kaun rokega ye sab... ???
posted a new one on same subject(bombblast) on ma site

Kunnu said...

kya hum itne bebas hai ki sirf is dard se sirf dahal hi sakte hai...? kya aisa kuch bhi nahi...jo hum kar sakte hai...jisse ki aage aisa haadsa dohraya na jaaye...kya hum itne lachar hai..?

Sunil Padiyar said...

Beautifully written... really, its heart touching :( .. May their souls R.I.P.. May god give their family the strength in this difficult time..

vidhya said...

kub kaha kesene lekne vale ke kalam pe dm hai, vah keya baat hai

kanu..... said...

हाँ कुन्नु हम सब बेबस है मौत के आगे ....भार्गव नेता क्या कर रहे है ये तो वही जाने पर ये सच है कि उन्हें बहुत सारे लोगो कि हाय लग रही है .
विद्या ये शब्दों का दम नहीं भावनाओ का अतिरेक है शायद....भगवान् सब मृतात्माओं को शांति दे और धन्यवाद् उसका कि हम आज भी जिन्दा है क्यूंकि कल तो कुछ नहीं कहा जा सकता अब....मैं खुशकिस्मत हु कि कल वहा नहीं थी पर हो भी सकती थी....

सुहास झेले said...

क्या कहूं..शब्द नही हैं मेरे पास :( :(

मीनाक्षी said...

नि:शब्द... स्तब्ध हूँ ... सोचती हूँ बार बार मानव के अन्दर दानव क्यों जीत जाता है....!!

kanu..... said...

सच है मीनाक्षी जी हर बार जाने क्यों ये दानव सर उठाकर अट्टहास करता है ...और हम कुछ नहीं कर पाते
शब्द हो भी नहीं सकते किसी के खोने कि पीड़ा को हम क्या शब्द दे सकते है बस दर्शक बनकर देखते रहते है इस दानव को जो जिंदगियों को लील जाता है....

Yash said...
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Yash said...

Dukh hota hai aaj bhi hum Govt k hath k katputli bankar rah gaye jo maan hota hai inka they are doing we are speechless shame on this Govt.

kanu..... said...

हाँ मैं सहमत हु यश .हमने ही इन्हें सर पर चढ़ाया है और अब ये हमारे सर पर चढ़कर मोत का तांडव रचा रहे है....

DR. ANWER JAMAL said...

ये आतंकवादी क्या पाना चाहते हैं ?
ये दरअसल अमन के दुश्मन हैं। इनके कुछ आक़ा हैं, जिनके कुछ मक़सद हैं। ये लोकल भी हो सकते हैं और विदेशी भी। जो कोई भी हो लेकिन इनके केवल राजनीतिक उद्देश्य हैं। ये लोग चाहते हैं कि भारत के समुदाय एक दूसरे को शक की नज़र से देखें और एक दूसरे को इल्ज़ाम दें। कभी कभी जनता का ध्यान बंटाने के लिए भी ये हमले किए जाते हैं। कुछ तत्व नहीं चाहते कि जनता अपनी ग़रीबी और बर्बादी के असल गुनाहगारों को कभी जान पाए। जनता को बांटकर आपस में लड़ाने की साज़िश है यह किसी की। इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं, उन तक पहुंचना भी मुश्किल है और उन्हें खोद निकालना भी। कुछ जड़ों से तो लोग श्रृद्धा और समर्पण तक के रिश्ते रखते हैं। ऐसे में कोई क्या कार्रवाई करेगा ?

इस बार भी बस ग़रीब ही पिसेगा !
उसी का ख़ून पानी है वही बहेगा !!

ग़द्दारों से पट गया हिंदुस्तान Ghaddar

रविकर said...

http://charchamanch.blogspot.com/
शुक्रवार : चर्चा मंच - 576

जानते क्या ? एक रचना है यहाँ पर |
खोजिये, क्या आपका सम्बन्ध इससे ??

Saru Singhal said...

Helpless state of affairs:(

veerubhai said...

मौत की पुनर -रचना करना यानी दोबारा मरना एक बम कितनों से कितनों के कितने रिश्ते तोड़ जाता है ?पूछो उस सेक्युलर शैतान से . वीरेंद्र शर्मा ,४३३०९ ,सिल्वर वुड ड्राइव ,केंटन (मिशिगन ),४८ १८८ .

Er. सत्यम शिवम said...

bhut sundar likha hai..bas padh kar nihsabd ho gaya....

kanu..... said...

haan sach hai jaan lene walo ka koi dharam imaan nahi hota.aap sabhi ka dhanyawad comment ke lie....

mahendra srivastava said...

बहुत ही मर्मस्पर्थी रचना। आंखे भर आईं..

संजय भास्कर said...

पापा की याद दिला दी...
बहुत सुन्दर कविता के लिए आभार...

संजय भास्कर said...

बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

kanu..... said...

dhanyawad mahendra ji avam sanjay ji

Nisheeth said...

Such a tragic incident... Great compilation indeed..I hope no one sees such tragic incidents in his/her life...May God bless the souls of innocent people who died in the attach..

Someone is Special said...

"tears"

Someone is Special

Anonymous said...

Excellent blog post, I have been reading into this a bit recently. Good to hear some more info on this. Keep up the good work!