Thursday, September 1, 2011

ये है मुंबई मेरी जान ye hai mumbai meri jaan


 ye hai mumbai meri jaan. bheed bhari anjani si kabhi jaanipahchani si ase hi bethe bethe kuch lines likhi hai....

सतरंगी सपने जेसे बलैक एंड व्हाइट से हो गए
मुंबई की गलियों में आकर सारे सपने खो गए

 
एक बड़ा सा बंगला हो जिसमे सुन्दर सा बगीचा हो
शाम की  हलकी ठंडक में चाय की चुस्कियां हो
जब पतिदेव घर पर आए तो ,
गार्डेन में  बातों का सिलसिला हो

पर बंगले के सारे सपने वन बी एच के से हो गए
मुंबई की गलियों में आकर सारे सपने खो  गए


एक लम्बी सी गाडी हो ,जिस पर हरदम नजर हमारी हो
रोज शाम की सेर हो , मुस्कानों का ढेर हो
बरसातों में आइसक्रीम  हो,बार बार लॉन्ग ड्राइव हो
पर बिन मौसम के बादल सारे सपने धो गए
मर्सिडीज़ जेसे सपने नैनो  वाले हो गए
मुंबई की गलियों में आकर सारे सपने खो  गए



आराम की जिंदगी हो ,भगवन की भी बंदगी हो
घर से ऑफिस पास हो ,बेबसी का ना अहसास हो
अपने लिए भी टाइम हो ,और अपने भी पास हो
पर भूल भुलैया में खोकर हम भीड़ का हिस्सा हो गए

बेस्ट की बस के धक्कों में हम पीड़ित जेसे हो गए
मुंबई की गलियों में आकर सारे सपने खो  गए

12 comments:

शालिनी कौशिक said...

bahut achchha bataya hai mumbai ke bare me.aabhar
सांसदों के चुनाव के लिए स्नातक होना अनिवर्य करे‏

प्रवीण पाण्डेय said...

सपने आपके भविष्य को गढ़ते रहते हैं।

एस.एम.मासूम said...

यह तो मुंबई पे ज़ुल्म किया भाई लोकल ट्रेन का ज़िक्र ही नहीं किया.

Kailash C Sharma said...

महानगर में पलते सपनों की बहुत सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति..

Bhushan said...

मुंबई की याद आई और यह भी याद आया कि मैं चार साल वहाँ रहा और भीड़ के डर के मारे लोकल ट्रेन में नहीं बैठता था. मुंबई में रह कर हिम्मतवाला ही सपने देखता है.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह!

रेखा said...

सही कहा है आपने .....सपने और हकीकत का फर्क बाद में पता चलता है

sHoNa said...

nice1 . u gt 1 more follower.

http://shonadesai.blogspot.com

kanu..... said...

thanx shona.
maasoom ji train ka jikar islie nahi kyunki abhi train se mera palla kam pad raha hai .
baki sabhi aagantukon ko dhanyawad

रविकर said...

बहुत बहुत बधाई की पात्र हैं ||

संजय भास्कर said...

बहुत बहुत बधाई

कौशलेन्द्र said...

मुम्बई है माया नगरी! सपनों की नगरी ...सपने यहाँ पलते हैं ..फलते हैं ..फूलते हैं। और हाँ ! मुम्बई किसी को निराश नहीं करती .....। जैसे पत्थर पर घिस कर तलवार पर शान रखी जाती है उसी तरह मुम्बई आदमी को घिस कर शानदार बना देती है। मुम्बई उनका हमेशा स्वागत करती है है जो संघर्ष में विश्वास रखते हैं।

ये है मुम्बई नगरिया तू देख बबुआ....