Tuesday, September 20, 2011

कही बिक जाए गम

कही बिक जाए गम तो बेचकर खुशियाँ खरीद ले
कुछ पूँजी जमा हो जाए यादों के सफ़र के लिए.

वो जो कहते हैं माँ का साथ कभी छूटता नहीं .
वो  लाकर दे मेरी माँ की लोरी हर रात बाकि सफ़र के लिए .

सोने के सिक्कों से गर सब ख़रीदा जा सकता है दुनिया में
मेरे बचपन की दुनिया ला दे मुझको  रहगुजर के लिए


जिन्हें लगता है महबूब की मोहब्बत  ही दुनिया है
मेरे बाबा (पिता ) के लाड देख ले वो रूककर पल भर के लिए .

बड़े इत्मीनान से जो सो जाते है कल की सुबह की खातिर
जरा सोचे किसे गम के आंसू दिए हैं रात भर के लिए .

मेरा मुस्तकबिल तेरे मुस्तकबिल  से जुड़ भी जाता शायद (भविष्य )
ना जाने किसने मुक़र्रर की जुदाई उम्र भर के लिए

तुझे मेरी मोहब्बत पर यकीन भी तब हुआ
जब इन्तेजार का वक़्त ना बचा तेरे मुन्तजिर (इन्तेजार करने वाला) के लिए .


आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

25 comments:

Bhushan said...

मेरा मुस्तकबिल तेरे मुस्तकबिल से जुड़ भी जाता शायद
न जाने किसने मुकर्रर की जुदाई उम्र भर के लिए

बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति और सुंदर रचना.

रविकर said...

बेहतरीन ||

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं।

induravisinghj said...

Beautiful thoughts,very well written....

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्दर प्रस्तुति...वाह!

Kajal Kumar said...

वाह जी सुंदर

arvind jain said...

कनु जी आपकी ये सुंदर रचना ऑरकुट पे पोस्ट कर रहा हु आपके नाम और लिंक sahit

संजय भास्कर said...

मन से निकली भावनाएं ...खूबसूरती से लिखी हैं ..अच्छी प्रस्तुति

वन्दना said...

मन के कोमल भावो को खूबसूरती से संजोया है।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत सुन्दर हृदयस्पर्शी भावाभिव्यक्ति....

Rajey Sha राजे_शा said...

वाकई ये लाईन तो बहुत ही बढिया कही कि‍
कहीं गम बि‍कते होते...

जुर्म क्या? ये सजा क्यों है?

दिगम्बर नासवा said...

मन की भावनाओं की स्पष्ट अभिव्यक्ति ... दिल को छूती हैं ...

इमरान अंसारी said...

बहुत खुबसूरत ............कुछ शेर बढ़िया लगे|

vidhya said...

बहुत ही बढ़िया
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

Dilbag Virk said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है.
कृपया पधारें
चर्चामंच-645,चर्चाकार- दिलबाग विर्क

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 23/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

मेरा मुस्तकबिल तेरे मुस्तकबिल से जुड़ भी जाता शायद
न जाने किसने मुकर्रर की जुदाई उम्र भर के लिए...

सुन्दर... वाह...
सादर...

Rajesh Kumari said...

बहुत बढ़िया बहुत उम्दा !हर शेर लाजबाब है ! पहली बार पढ़ रही हूँ आपकी रचना !चलिए जुड़ रही हूँ आपकी श्रंखला में !

सदा said...

मेरा मुस्तकबिल तेरे मुस्तकबिल से जुड़ भी जाता शायद
न जाने किसने मुकर्रर की जुदाई उम्र भर के लिए

हर शब्‍द गहरे उतरते हुये .. बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।

kanu..... said...

sabhi naw aagantukon ka swagat hai aur jo hamesha se aate rahe hai unka bahut bahut dhanyawad

Loks® =) said...

bahut hi behtareeen aur dil ko chhu jane wali bhavnaaye...kahin na kahin har kisi ki life ki yehi kahaani hai....!!!bahut hi behtareeen aur dil ko chhu jane wali bhavnaaye...kahin na kahin har kisi ki life ki yehi kahaani hai....!!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर प्रस्तुति

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन प्रस्तुती....

Praveen said...

bahut hi badiya varnan kia hai shabdo se bhawnao ka.....sacchi dil ko chu lia aapne

Anonymous said...

A topic near to my heart thanks, ive been wondering about this subject for a while.