Sunday, May 13, 2012

कुछ तो हो जिसकी खातिर वो जिए.....


अकेलेपन का ज़हर सबसे जबरजस्त ज़हर होता है और इसके नशे से ज्यादा गज़ब का नशा भी और कोई नहीं होता ...लड़की हमेशा से इस ज़हर से बचना  चाहती  थी जब भी अकेली  होती  थी उसे  लगता  था  खो  जाएगी कही खुद में... और वो ये बात भली तरह जानती थी की दुनिया की भीड़ में खो जाना उसके लिए फिर भी गवारा था पर अगर खुद में खो गई तो कोई उसे उसके आपसे बाहर नहीं निकाल पाएगा कभी भी नहीं किसी भी उपाय से नहीं ..वो आम थी एकदम साधारण या शायद कुछ लोग उसे साधारण ने नीचे की किसी श्रेणी में रखना ज्यादा पसंद कर सकते है....और इसी आमपन से उपजी उम्मीदों ने उससे उसका खास्पन छीन लिया...
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रात के अँधेरे में लोग आत्मसाक्षात्कार  जेसा कुछ करते है लड़की ने कई बार ये बात सुनी थी पर वो तो दिन के उजाले में भी खुद से बातें करती थी जितनी बातें दुनिया से उससे कही ज्यादा खुद से पर उसे जानने वाला हर शख्स उसके बारे में अलग ढंग से सोचता है अलग राय रखता है  ,और यहाँ तक की ज्यादातर लोगो का मानना है  की वो उसे बहुत अच्छे से जानते है पर लड़की बिचारी ये नहीं समझ पाती की सारी दुनिया उसे उससे बेहतर जानती है बस वो ही क्यों नहीं खुद को समझ पाती....रात के अँधेरे में अकेले बेठना अब उसे अच्छा लगने लगा ...सच है समय के साथ सब बदल जाता है ,लड़की इस बात में विश्वास  नहीं करती पर इस सच का हिस्सा है ....और हिस्सा है ये बात जानते हुए भी विश्वास करना नहीं चाहती क्यूंकि वो जानती है जिस दिन उसे ये विश्वास हो गया की सब बदल जाता है उसकी जिंदगी से उम्मीद ख़तम हो जाएगी और उसने अपनी जिंदगी की डोर इन उम्मीदों के सहारे तो बांधी हुई थी.....
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एक समय था जब लड़की मानती थी प्रेम जैसा कुछ नहीं होता और इससे भी ज्यादा ये मानती थी की अगर एसा कुछ होता भी है तो उसकी जिंदगी में हो ही नहीं सकता ...lady हिटलर जेसी कुछ थी वो ...एकदम rude दुनिया हिल जाए पर प्यार नहीं होगा ...पर हुआ जब हुआ तो बड़ा जमकर हुआ और अचानक से एकदिन छूट गया क्यों गया कैसे गया ये लड़की ने कभी किसी को नहीं बताया ,फिर लड़की ने ये मानना शुरू किया की  वो प्यार उसकी किस्मत में था ही नहीं ..उसने दूसरों की तरह ये नहीं माना  की उसे फिर प्यार नहीं होगा या प्यार एक बार होता है उसने तो माना  की जब तक उसे सच्चा प्यार नहीं मिलेगा उसे बार बार प्यार होगा ....इस बार उसका विस्वास नहीं टूटा उसे फिर प्यार हुआ ,और इस बार उसका मन मयूर नाच उठा उसने बेतहाशा प्यार किया ...खूबसूरती से प्यार जिया पर उपरवाले ने एसी लड़कियां कम बनाई है जो टूट टूटकर प्यार करे और कभी कभी वो एसी लड़कियों को ही तोड़ देता है ..उसने  अपने एक्सपेरिमेंट के लिए एसी लड़कियां बनाई है ताकि अलग तरीके से इन्हें तोड़ सके...सो तोड़ दिया उस प्यार ने उस लड़की की हर उम्मीद को तोड़ दिया..मजबूर  कर दिया फिर से ये मान लेने पर की सच में दुनिया में प्यार जैसा कुछ नहीं होता ......
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जब भी लड़की किसी पीने वाले को देखती थी उसे बड़ी कोफ़्त होती थी नफरत थी उसे शराब से पर नफरतें भी तो साथ कहा देती है जिंदगी भर आजकल लड़की को रात के अंधेरों में एकदम तन्हाई में व्हिस्की की बोतल  के साथ बेठे खुद से बातें करते जाम की हर बूँद से बातें करते देखा जा सकता है......उसके पास बस यही एक रास्ता था उसके हिसाब से या पीना या पागल हो जाना ,हाँ एक और रास्ता था जो हमेशा सबके पास होता है मर जाने का पर उसे उपरवाले से ज्यादा नफरत हो गई है आजकल... वो अच्छे लोगो को जल्दी वापस बुलाता है इस बात को गलत सिद्ध कर देना चाहती है वो ...पूरी दुनिया की नज़र में बुरी बनकर वो उसके पास जाना चाहती है और उसे जता देना चाहती है की भली लड़कियों के साथ एक्सपेरिमेंट करने का क्या नतीजा हो सकता है....आखिर उसे जीने के लिए कोई तो मकसद चाहिए न.....कुछ तो हो जिसकी खातिर वो जिए...चाहे वो बुरा बनना ही क्यों न हो ......????

आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

10 comments:

Ramakant Singh said...

khubsurat aihasaas ke sath hi jiyaa jaye. jine ka andaz bhi nirala ho , log mudkar aapako dekhen aur kah uthen ki na jane kitani bahare aai aur chli gai lekin isake jine andaz nirala raha.jindagi badi siddat se jiya jata hai.

रविकर फैजाबादी said...

सुन्दर प्रस्तुति |
बधाई ||

प्रवीण पाण्डेय said...

कुछ भरा, कुछ रिक्त, संतुलित सा मन..

dheerendra said...

आपने सही कहा,कुछ तो चाहिए जिसके लिए जिए,....
सुंदर भाव पुर्ण अभिव्यक्ति ,...

MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १५ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

Pallavi said...

ऐसा हमेशा लड़कियों के साथ ही क्यूँ होता है क्या कभी कोई लड़का किसी लड़की से टूट-टूट कर प्यार नहीं कर सकता.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

jeene ke bahane lakhon the koi bhee use aaya hee nahi..koi bhee uska ho sakta tha kabhi usne ajmaya hee nahi...pyar kisi gun bishesh ke karan hota hai..phir tamam bisangtiyan dikhtee hain..samanjasya bithana hee padtha hai..naye tarah kee badhiya soch..aanand aaya..aapko sadar badhayee aaur apne blog per amantran bhee

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

pyar ab yahan toot toot kar hee ho paa raha hai

दिगम्बर नासवा said...

जीने के लिए कोई तो मकसद होना जरूरी है ... प्रेम हो न हो ...

bkaskar bhumi said...

कनुप्रिया जी नमस्कार
आपके ब्लॉग 'परवाज' से लेख भास्कर भूमि में प्रकाशित किया जा रहा है। आज 1 अगस्त को 'कुछ तो हो जिसक खातिर वो जीए...' शीर्षक के लेख को प्रकाशित किया गया है, इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जा कर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
धन्यवाद,
फीचर प्रभारी
नीति श्रीवास्तव