Friday, July 5, 2013

क्यों खंड खंड है उत्तराखंड



parwaz blog:kyo khand khand hai uttarakhand




लाशों के ढेरों के बीच 
मानवता कराह रही 
बिगड़े हालातों के  बीच 
भूख हिलोरे मार रही 
बिना दस्तक के आ गया 
सारी वादी में प्रचुर विध्वंस 
किससे करें सवाल 
क्यों खंड खंड है उत्तराखंड 


क्यों बांधों ने सीना चीरा 
क्यों नदियों का रस्ता मोड़ा 
क्यों पत्थर में छेद कर दिया 
मिटटी में बारूद भर दिया 
क्यों रक्षक भक्षक बन बैठे 
क्यों अनजाने शासक बन बैठे 
सब तरफ है हाहाकार 
ये मानवता पर कैसा दंश 
किससे करें सवाल 
क्यों खंड खंड है उत्तराखंड 

क्यों माओं का आँचल सूना है 
पीड़ित घर का हर कोना है 
क्यों ये विषम आपदा आई 
क्यों शासक लेते जम्हाई 
क्यों हमने कोई पाठ न पढ़ा 
क्यों लोहे गिट्टी रेत  को चुना 
देव दर्शन को गए लोग 
और उजड़ गए वंश के वंश 
किससे करें सवाल 
क्यों खंड खंड है उत्तराखंड 

(Note:ये रक्षक शब्द सेनिको के लिए  नहीं है )
 आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

7 comments:

कविता रावत said...

इस क्यों का किसी के पास माकूल जवाब नहीं है ..
मार्मिक प्रस्तुति ..

शारदा अरोरा said...

कनु जी , बढ़िया अभिव्यक्ति ...

वाणी गीत said...

करते रहें सवाल , जवाब देने की किसको पड़ी है एक दुसरे पर कीचड उछलने के सिवा :(

प्रवीण पाण्डेय said...

दुखद होती परिस्थितियाँ..

Manav Mehta 'मन' said...

maarmik...

Alpana Verma said...

मर्मस्पर्शी रचना

PoeticRebellion said...

Bahut Khoob