Thursday, January 5, 2012

भटक जाने को जी चाहे

कुछ  टुकड़ों टुकड़ों में लिखी हुई पंक्तियाँ है आज बस यही....


1) जानते है इश्क में दिल टूटते हैं बेतरह
पर  हर शय में  थोडा सा  तड़क जाने को जी चाहे
राहे मोहब्बत में भूल भुलैया भी मिलेगी
सब जानते हुए भी भटक जाने को जी चाहे

तुम कहते रहो की दूर रहो आग हू जल जाओगे
पर इस आग में शोले सा धधक जाने को जी चाहे
तुम चाँद की किरणों से चमकते हुए  नूर
अँधेरा बनकर तेरी रौशनी में सिमट जाने को जी चाहे......

2)
चाँद चांदनी के किस्से बड़े पुराने हो गए
अपना इक किस्सा गढ़ दे उन  दोनों को शरमा दे हम
सागर और लहरों की बातें बेगानी सी लगती है
अपनी कुछ बातें खास करें कुछ गीत नए बना दे हम
तुमने मुझको छुपकर देखा मैंने मन ही मन समझ लिया
तुम मुझमे हो मैं तुममे हूँ आ दुनिया को समझा दे हम 



आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

18 comments:

S.N SHUKLA said...

सुन्दर रचना , सुन्दर भाव, बधाई.

पधारें मेरे ब्लॉग meri kavitayen पर भी, मुझे आपके स्नेहाशीष की प्रतीक्षा है.

ASHA BISHT said...

SUNDAR...

vidha said...

प्यार के कठिन भाव की सरलता सहजता से अभिव्यक्ति

इमरान अंसारी said...

पहला शेर बहुत अच्छा है ........दाद कबूल करे|

कविता रावत said...

प्रेम की सुन्दर सहज अभिव्यक्ति बहुत अच्छी लगी ....
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Sanju said...

बहुत ही सुन्दर.............. मेरे ब्लॉग पर आपको आमंत्रित करता हूँ।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन।


सादर

कौशल किशोर said...

सही बहुत सही
प्यार को अँधा यूं ही नहीं कहा गया.
बधाई.
मेरे ब्लॉग को पढने और जुड़ने के लिए क्लीक करें इस लिंक पर.
http://dilkikashmakash.blogspot.com/

Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

shashi purwar said...

bahut khoob sunder abhivyakti....badhai .

Reena Maurya said...

दोनों ही रचनाये बहुत ही सुन्दर है..
पहलेवाली तो बहुत ही अधिक सुन्दर है...
ये जानते हुए भी की इश्क में कुछ न मिलेगा फिर इश्क की आग में जल जाने को जी चाहता है...
बहुत ही सही बात कही है...
गहरे भाव और सुन्दर अभिव्यक्ति...
mauryareena.blogspot.com
संस्कार कविता संग्रह में आपका स्वागत है..

Sonit Bopche said...

बहुत सुन्दर लिखा है आपने...आभार...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

अन्धेरा बनाकर तेरी रोशनी में सिमट जाने को जी चाहे....
सुन्दर रचना....

Kailash Sharma said...

बहूत सुन्दर भावपूर्ण रचना...

dheerendra said...

सुंदर अभिव्यक्ति बढ़िया रचना,....
welcom to--"काव्यान्जलि"--

Anonymous said...

Very useful reading. Very helpful, I look forward to reading more of your posts.

PRAVEEN GULATI said...

Atti sunder......!!!!!

PRAVEEN GULATI said...

Atti sunder......!!!!!