Monday, April 1, 2013

जीव हत्या :धर्म की रोटी से बोटी मत तोडिये

गौ हत्या को लेकर हमेशा से तरह तरह के विवाद उठते रहे हैं कई संगठन और व्यक्ति समय समय इस मुद्दे अपनी बात रखते रहते है और विराध किया भी जाना चाहिए क्योंकि किसी  भी जीव की हत्या किया जाना मानवीय और नैतिक रूप पूरी तरह सही है।
सामान्य तौर पर देखा जाए तो हमेशा से ये लड़ाई कभी धर्म या कभी शाकाहार -माँसाहार के मुद्दे के नाम पर लड़ी जाती रही है या अपनी धार्मिक रीतियों का और पूजा इबादत का हवाला देकर गौ हत्या सम्बन्धी तर्क रखे जाते रहे हैं . सरसरी तौर पर देखा जाए तो तो ये सारे तर्क सही प्रतीत होते  हैं।
जब मुद्दे की गहराई में जाएँगे तो देखेंगे धर्म के नाम पर गौ हत्या का विरोध करने वाले, दिन भर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इस तरह के फोटो शेयर करने वाले लोगो में से बड़ी संख्या असे लोगो की है जो हजारो लाखो मुर्गो बकरों के क़त्ल के जिम्मेदार हैं इनमे से कितने ही लोग ऐसे हैं जिनके 2,3 दिन भी चिकन मटन खाए बिना नहीं गुजरते .

ये बात सच है की हिन्दू धरम के अनुसार गाय मत के समान है परन्तु धर्म ने ये भी कहा है की सभी जीवो पर दया की जानी चाहिए . धर्म ने ये कभी नहीं कहा की गाय के अलावा अन्य जीव प्राणवान नहीं हैं और उनकी हत्या करना क्षम्य है।
मैं इस बात से सहमत हु की हिन्दुओं की बड़ी संख्या शाकाहारी है सभी प्रकार की जीव हत्या को गलत मानती है पर यकीन मानिये इस बड़ी संख्या का लगभग प्रत्येक व्यक्ति कभी न कभी किसी न किसी प्रकार से गौहत्या के लिए जिम्मेदार रहा है।

यही इस सिक्के का दूसरा पहलु है हम सभी जानते हैं की हिन्दू धर्म में हम लोग चांदी  के वर्क का प्रयोग शुभ मानते हैं तथा इसे अपनी मिठाइयों पर लगाने को महत्व देते हैं साथ ही साथ अपने देवताओं को भी चांदी के वर्क से श्रंगारित करते आए हैं . तकनिकी के बढ़ते प्रचार और ज्ञान प्रसार के कारण हम में से कई लोग ये बात जानते हैं की चांदी का ये वर्क बनाने की प्रक्रिया में गाय की आँतों  का इस्तेमाल  किया जाता है और चमड़े के पाउच में इस वर्क को पीट पीटकर पतला किया जाता है , पर सब कुछ जानते समझते हम लोग सोशल नेटवर्किंग साईट पर गौ हत्या का विरोध भी करते हैं और मंगलवार को जाकर हनुमान जी को चांदी के वर्क का चोल भी चढाते हैं।और गणेश जी को वर्क लगे लड्डुओं का भोग भी लगते हैं।तब हमें न गौ मत याद आती हैं न शाकाहार ?फिर  गौ मांस का सेवन करने वाले ही क्यों हम लोग भी तो जिम्मेदार हुए गौ हत्या के ?

सब जानते हुए भी हम ये सब करते हैं और इसका कारण ? कारण बस एक ही है की हम धर्म को समाज को अपनी सहूलियत के हिसाब से एडजस्ट कर लेना चाहते है अपनी सुविधा और स्वाद के हिसाब से ये निर्णय लेते हैं की मुर्गी खाना या बकरा खाना ठीक है और गाय खाना पाप क्योंकि  गाय हमारी माता है .
पर उसी माता को बुचद्खाने में मार दी जाने के बाद मिले उत्पादों की सहायता से बने चांदी के वर्क से  मिठाई खाते हैं और अपने इश्वर को अर्पण करते हैं .और फिर जब मन होता है धर्म के नाम पर तलवारें निकालकर दौड़ पड़ते हैं।
पर दूसरों पर उँगलियाँ उठाते समय सभी भूल जाते हैं की बुराइयाँ ,कुप्रथाएँ हर जगह है  और हमाम में सब एक जेसे ही हैं और अन्दर से सभी खोखले हैं .

ये सच है की जब लोग बुरे का विरोध नहीं कर सकते ,गलत प्रथाओं और रीतियों के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा सकते अपनी सुविधा के हिसाब से ये निर्णय लेते हैं की कौन से जीव की हत्या उचित हो सकती है ,जो लोग सभी जीवों के प्राणों को सामान नहीं मान सकते या असा कोई भी व्यक्ति जो प्रत्यक्ष रूप से मांसाहारी है उसे गौ हत्या के लिए किसी  भी धरम विशेष पर अपने धरम की आड़ लेकर विवाद खड़ा करने का हक नहीं है।याद रखिए जीव हत्या किसी भी रूप में क्षम्य नहीं होनी चाहिए चाहे वो आप करे या कोई और करे   ।

जो लोग मांसाहार करते हैं ऐसे किसी व्यक्ति को हक नहीं की वो धार्मिक कलह को बढ़ावा दे क्यूंकि या तो सभी जीवों पर दया करिए ,मानव धर्मी बन जाइये किसी भी तरह का मांसाहार मत करिए और जीव हत्या में से पूरी तरह तौबा कर लीजिए या फिर धरम को खिलौना बनाकर अपनी सुविधा के हिसाब से तोडना मरोड़ना बंद करिए और जो खाना है खाइए ये आपका निर्णय है पर फिर धरम के नाम की रोटी से बोटी मत तोडिये 
...........
(लेखिका सवयम पूरण शाकाहारी है और इस लेख को लिखने के लिए किए गए अध्यन के बाद चांदी के वर्क से हमेशा के लिए तौबा करती है )

आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

11 comments:

Kuldeep Thakur said...

सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

आप की ये रचना 05-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। आप भी इस हलचल में अवश्य शामिल होना।
सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।
सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

आप की ये रचना 05-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। आप भी इस हलचल में अवश्य शामिल होना।
सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

सुज्ञ said...

जागृति प्रेरक आलेख!!
सात्विक शुद्ध मन विचारों से ही जीवदया सार्थक है.
अहिंसा ही प्रमुख कारक और कारण है.
क्रूरता का पूर्ण शमन आवश्यक है.

इस बहुमूल्य चिंतन के लिए आपका अनंत आभार!!!

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार2/4/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां स्वागत है

शालिनी कौशिक said...

.विचारणीय प्रस्तुति आभार जया प्रदा भारतीय राजनीति में वीरांगना .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

प्रवीण पाण्डेय said...

जब चेतना विकसित होगी..शाकाहार अनुप्राणित हो जायेगा।

संजय अनेजा said...

हम तो बहुत समय से चांदी के वर्क को अवायड करते हैं।
अच्छी जानकारी शेयर की है आपने।

Rajendra Kumar said...

बहुत प्रेरक प्रस्तुति,चांदी के वर्क वाले मिठाइयों से परहेज करना ही चाहिए.

dr.mahendrag said...

सार्थक ,यह बात भी विचारनीय है,बर्क के इस्तेमाल से बचना चाहिए.वैसे यह भी एक तथ्य है किआज बर्क चांदी के बजाय एल्युमीनियम के ही आ रहें हैं, हम मूल्य जरूर चांदी का चुकातें हैं दुसरे अब यह काम मशीने करने लग गयी हैं क्योंकि पुराना तरीका बहुत महंगा पड़ने लगा है.परहेज तो दोनों से ही अपने अपने कारणवश करना चाहिए.

दिगम्बर नासवा said...

जागरूक करता है आपका लेख ... विचारणीय विषय ...

पूरण खण्डेलवाल said...

सार्थक सन्देश देता आलेख !!

Manohar Chamoli said...

सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...