Friday, August 3, 2012

काले बर्तन या काला ज़हर


टेफलोन शीट तो याद होगी सबको कैसे याद नहीं होगी आजकल दिन की शुरुवात ही उससे होती है चाय बनानी  है तो नॉन स्टिक तपेली (पतीली) ,तवा,फ्राई पेन ,ना जाने कितने ही बर्तन हमारे घर में है जो  टेफलोन कोटिंग वाले हैं फास्ट टू  कुक इजी टू क्लीन वाली छवि वाले  ये बर्तन हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गए है ,जब ये लिख रही  हू तो दादी नानी वाला ज़माना याद आ जाता है जब चमकते हुए बर्तन स्टेंडर्ड की निशानी माने जाते थे  आजकल उनकी जगह काले बर्तनों ने ले ली .

हम सब इन बर्तनों को अपने घर में उपयोग में लेते आए है और शायद कोई बहुत बेहतर विकल्प ना मिल  जाने तक आगे भी उपयोग करते रहेंगे पर ,इनका उपयोग करते समय हम ये बात भूल जाते है की ये हमारे शरीर  को नुक्सान पहुंचा सकते है या हम में से कई लोग ये बात जानते भी नहीं की सच में एसा कुछ हो सकता है  कि ये बर्तन हमारी बीमारियाँ बढ़ा सकते है या हमारे अपनों को तकलीफ दे सकते है और हमारे पक्षियों  की जान भी ले सकते है .
चौंकिए मत ये सच है .हालाँकि टेफलोन को २० वी शताब्दी की सबसे बेहतरीन केमिकल खोज में से एक माना गया है  स्पेस सुइट और पाइप में इसका प्रयोग उर्जा रोधी के रूप में किया जाने लगा पर ये भी एक बड़ा सच है की ये स्वास्थ के लिए हानिकारक है  इसके हानिकारक प्रभाव जन्मजात बिमारियों ,सांस की बीमारी जेसी कई बिमारियों के रूप में देखे जा सकते हैं 

ये भी सच है की जब  टेफलोन कोटेड बर्तन  को अधिक गर्म किया जाता है तो पक्षियों की जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है कुछ ही समय पहले १४ पक्षी तब मारे गए जब टेफलोन के बर्तन को पहले से गरम किया गया और  तेज आंच पर खाना बनाया गया ,ये पूरी घटना होने में सिर्फ १५ मिनिट लगे. 
टेफलोन कोटेड बर्तनों में सिर्फ ५ मिनिट में ७२१ डिग्री टेम्प्रेचर तक गर्म हो जाने की प्रवत्ति देखी गई है और इसी दोरान ६ तरह की गैस वातावरण में फैलती है इनमे से २ एसी गैस होती है जो केंसर को जन्म दे सकती है .अध्यन बताते हैं की  टेफलोन  को अधिक गर्म करने से  टेफलोन टोक्सिकोसिस (पक्षियों के मामले में ) और पोलिमर फ्यूम फीवर ( इंसानों के मामले में ) की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है .

टेफलोन  केमिकल के शरीर   में जाने से होने वाली बीमारियाँ:
१ . पुरुष इनफर्टिलिटी :  हाल ही में किए गए एक डच अद्धायण में ये बात सामने आई है लम्बे समय तक टेफलोन  केमिकल के शरीर में जाने से पुरुष इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है और इससे सम्बंधित कई बीमारियाँ पुरुषों में देखी जा सकती है .
२. थायराइड :  हाल ही में एक अमेरिकन एजेंसी  द्वारा किया गए अध्यन में ये बात सामने आई की टेफलोन की मात्र लगातार शरीर में जाने से  थायराइड ग्रंथि सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है .
३. बच्चे को जन्म देने में समस्या :  केलिफोर्निया में हुई एक स्टडी में ये पाया गया की जिन महिलाओं के शरीर में जल ,वायु या भोजन  किसी भी माध्यम से पी ऍफ़  ओ (टेफलोन) की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई उन्हें बच्चो को जन्म देते समय अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ा इसी के साथ उनमे बच्चो को जन्म देने की शमता भी अपेक्षाकृत कम पाई गई .
४ . केंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा :  एक प्रयोग के दौरान जब चूहों को पी ऍफ़  ओ के इंजेक्शन लगाए गए तो उनमे ब्रेन ट्यूमर विकसित हो गया साथ ही केंसर के लक्षण भी दिखाई देने लगे .  पी ऍफ़  ओ जब एक बार शरीर के अन्दर चला जाता है तो लगभग ४ साल तक शरीर में बना रहता है जो एक बड़ा खतरा हो सकता है .
५.  शारीरिक समस्याएं व अन्य बीमारियाँ :  पी ऍफ़  ओ की अधिक मात्रा शरीर में पाई जाने वाली महिलाओं के बच्चो पर भी इसका असर जन्मजात शारीरिक समस्याओं के रूप में देखा गया है  इसीस के साथ अद्द्याँ में ये सामने आया है की पी ऍफ़  ओ की अधिक मात्रा लीवर केंसर का खतरा बढ़ा देती है .

टेफलोन के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय 
  1. टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों को कभी भी गैस पर बिना कोई सामान डाले अकेले गर्म होने के लिए ना छोड़े.
  2. इन बर्तनों को कभी भी ४५० डिग्री से अधिक टेम्प्रेचर पर गर्म ने करे सामान्यतया इन्हें ३५० से ४५० डिग्री तक गर्म करना बेहतर होता है 
  3. टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों  में पाक रहा खाना बनाने के लिए कभी भी मेटल की चम्मचो का इस्तेमाल ना करे इनसे कोटिंग हटने का खतरा बढ़ जाता है 
  4. टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों  को कभी भी लोहे के औजार या कूंचे ब्रुश से साफ़ ना करे , हाथ या स्पंज से ही इन्हें साफ़ करे 
  5. इन बर्तनों को कभी भी एक दुसरे के ऊपर जमाकर ना रखे 
  6. घर में अगर पालतू पक्षी है तो इन्हें अपने किचन  से दूर रखें 
  7. अगर गलती से घर में एसा कोई बर्तन ज्यादा टेम्प्रेचर पर गर्म हो गया है तो कुछ देर के लिए घर से बाहर चले जाए और सारे खिड़की दरवाजे खोल दे पर ये गलती बार बार ना दोहराएं  क्यूंकि बाहर के वातावरण के लिए भी ये गैस हानिकारक है 
  8. टूटे या जगह ,जगह से घिसे हुए  टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों का उपयोग बंद कर दे क्यूंकि ये धीरे धीरे आपके भोजन में ज़हर घोल सकते है ,अगर आपके बर्तन नहीं भी घिसे है तो भी इन्हें २ साल में बदल लेने की सलाह दी जाती है
जहाँ तक हो सके इन बर्तनों कम ही प्रयोग करिए इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने और अपने परिवार के स्वास्थ  को बेहतर बना सकते हैं .
इस पोस्ट को  मीडिया दरबार  और भास्कर भूमि   पर भी देखा जा सकता है 

आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

12 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बिना सोचे समझे इस तरह के बर्तन क्यों प्रारम्भ कर दिये जाते हैं तब?

dheerendra said...

बेहतर विकल्प यही की इनका उपयोग बंद कर दिया जाय,,,जानकारी के लिए आभार,,,

RECENT POST काव्यान्जलि ...: रक्षा का बंधन,,,,

Reena Maurya said...

इनका उपयोग बंद करने में ही भलाई है..
उपयोगी जानकारी .....
:-)

वन्दना said...

उपयोगी जानकारी

वन्दना said...

उपयोगी जानकारी

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 05/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Asha Saxena said...

बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दी है |अब आगे से सतर्क रहेंगे |
आशा

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत महत्त्वपूर्ण जानकारी

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सार्थक लाभदायक शोधपूर्ण आलेख...
सादर.

bkaskar bhumi said...

कनुप्रिया जी नमस्कार...
आपके ब्लॉग 'परवाज' से लेख भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 5 अगस्त को 'काले बर्तन या काला जहर' शीर्षक के लेख को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
धन्यवाद
फीचर प्रभारी
नीति श्रीवास्तव

दिगम्बर नासवा said...

जागृत करती पोस्ट ... कभी कभी इन बातों का एहसास ही नहीं रहता ...

Pallavi saxena said...

बढ़िया जानकारी यहाँ विदेशों में इन बर्तनो का उपयोग जरूरत से ज्यादा ही होता है।