Thursday, June 21, 2012

मुझे जबसे तुमसे प्रेम हुआ बस तेरा चेहरा बुनती हू

एक ही धागा, इक ही रंगत ,इक ही सांचा चुनती हूँ
मुझे जबसे तुमसे प्रेम हुआ ,बस तेरा चेहरा बुनती हू

तुम्हे उलझा दू ,तुम्हे सुलझा लू
ज़रा ठुकराकर तुम्हे अपना लू
सारे गुण औगुन बेकार हुए
बस तेरे सब गुण गुणती हू
मुझे जबसे तुमसे प्रेम हुआ बस तेरा चेहरा बुनती हूँ


तुम्हे दूर करू थोडा पास करू
थोड़ी शंका थोडा विश्वास करू
मेरे जीवन का आधार तुम्ही
बस तुमसे तुम्हारी आस करू
हर दिन अपने अंतर्मन से तेरी आवाजें सुनती हू
मुझे जबसे तुमसे प्रेम हुआ बस तेरा चेहरा बुनती हू


मेरे स्वप्न महल का उच्च शिखर
मेरे अंधियारों की श्वेत डगर
हर रस्ता तुम तक एसे जाए
जैसे अंतर्मन तक जाए शब्द प्रखर
जन्मों जन्मो का साथ प्रिये हर जनम में तेरी बनती हू
मुझे जबसे तुमसे प्रेम हुआ बस तेरा चेहरा बुनती हू...

आपका एक कमेन्ट मुझे बेहतर लिखने की प्रेरणा देगा और भूल सुधार का अवसर भी

15 comments:

ANULATA RAJ NAIR said...

यही तो पागलपन है प्रेम का.....एक चेहरे के सिवा कोई चेहरा दिखता ही नहीं......

बहुत सुन्दर कनु जी.

अनु

प्रवीण पाण्डेय said...

अत्यन्त प्रभावी प्रेमाभिव्यक्ति..

kanu..... said...

bahut bahut dhanyawad

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...
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धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

मन के भावों द्वारा प्रभावी प्रेमाभिव्यक्ति की सुंदर प्रस्तुति.

MY RECENT POST:...काव्यान्जलि ...: यह स्वर्ण पंछी था कभी...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...
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ब्लॉ.ललित शर्मा said...

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Smart Indian said...

बहुत खूब!

रश्मि प्रभा... said...

प्यार कुछ भी करने का सामर्थ्य रखता है .... उसकी क्षमताएं अदभुत होती हैं

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति

अरुन अनन्त said...

वाह वाह बहुत सुन्दर पंक्तिया
(अरुन = arunsblog.in)

vandan gupta said...

्बस यही तो भाव की उत्कृष्टता है।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

अति सुंदर...प्रेमपगी पंक्तियाँ

VIJAY KUMAR VERMA said...

बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....