"मैंने कहा था" उसकी जिंदगी का हिस्सा है ज़िन्दगी में मौजूद हर शख्स
बस ये तीन लफ्ज़ बोलकर
अपनी हर चिंता से मुक्त हो जाता है
या स्वयं को शासक और उसे सेवक
की जगह खड़ा कर देता है हर रोज़
सुबह से लेकर रात तक वो
"मैंने कहा था" में उलझी रहती है
अब तक नहीं हुआ ये काम
मेरे जूते धुप में रखना
स्त्री के कपडे दे आना
खाने में ये बनाना
इस रिश्तेदार से एसे मिलना
उससे एसे बात करना
इस त्यौहार पर ये रीत निभाना
घर आँगन एसे सजाना
बच्चो को ये सब सिखाना
और भी ना जाने कितने
"मैंने कहा था" के साथ जुड़े वाक्य
और कहा अधुरा रह जाने पर जुडी कडवी बात
हर रोज वो अपने आस पास मंडराती देखती है .
अलग अलग लोग पर बस तीन शब्द
जिन्हें बोलकर वो आज्ञा देते हैं
और वो करती है कोशिश हर
मैंने कहा था को पूरा करने की
मैंने कहा था को पूरा करने की
सारे "मैंने " सारे "मैं" उसके आगे
विकराल रूप धारण करते हैं
और वो हर रोज़ सोचती हैं
वो भी तो कुछ कहती है
कभी सुना है किसी ने ?